शुक्रवार, 4 जुलाई 2008

धधक रहा है झरिया !

चिट्ठाजगत
प्राइम कोकिंग कोल के लिए विश्व प्रसिद्द झरिया के भूगर्भ में वर्षों पुरानी आग की विभीषिका ख़बर अब पुरानी हो चली है। नयी ख़बर है कि झरिया की धरती इंसानी गुस्सों से धधक रही है। कारण है कि झारखण्ड सरकार ने जमीनी आग के संभावित खतरों से बचाव के लिए झरिया के खतरनाक इलाकों में रह रहे लोगों के पुनर्वास के लिए योजना को हरी झंडी दिखा दी है। पर झरिया की जनता मानने को तैयार नहीं है कि भूगर्भ की आग इतनी विकत है की पूरी झरिया को ही लील जाए। जनता मान कर चल रही है की भूगर्भ से कीमती कोयला निकलने के लिए जमीनी आग का खौफ दिखाया जा रहा है।
झरिया पुनर्वास योजना : धनबाद नगर निगम के वर्तमान क्षेत्र से 1,83,223 ग्रामीण अलग होंगे। माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति हेतु नियमावली तैयार है।
आम आदमी बीमा योजना मंजूर कर ली गई है। योजना की हद में भूमिहीन आएंगे। उनके परिवार को मौत पर 30 हजार रुपये तथा दुर्घटना में मृत्यु पर 75 हजार रुपये की राशि देय होगी। बीमित व्यक्ति की उम्र 18 से 59 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवश्यक राशि में केंद्र व राज्य के बीच आधे-आधे की भागीदारी होगी। योजना से तीन लाख 12 हजार भूमिहीन लाभान्वित होंगे। कैबिनेट ने झरिया पुनर्वास योजना स्वीकृत कर दी। यह पुनर्वास नीति बीसीसीएल के 44,155, गैर बीसीसीएल के 29,444 अधिकृत विस्थापित परिवारों व 33,847 अनधिकृत विस्थापित परिवारों पर प्रभावी होगी। गैर बीसीसीएल के अधिकृत विस्थापित परिवारों को ही मुआवजे की राशि देय होगी। अनधिकृत विस्थापितों के लिए बहुमंजिली इमारत में 27 वर्गमीटर के कारपेट एरिया का आवास प्राप्त होगा। अधिकृत विस्थापितों के समक्ष तीन विकल्प होंगे। पहला, 100 वर्गफीट का नि:शुल्क भूखंड या पुनर्वास स्थल पर बहुमंजिली इमारत में 40 वर्गफीट के कारपेट एरिया में आवास या फिर बड़े परिवार की स्थिति में 100 वर्गफीट के अतिरिक्त जमीन देय होगी किन्तु बाजार दर पर। साथ ही सामान की ढुलाई को 10 हजार व प्रत्येक परिवार के मुखिया को दो वर्ष के लिए 250 दिनों का काम प्रदान किया जाएगा।

क्यों है जमीनी आग? :(निरंतर): खदानों में आग लगने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार १०० डिग्री तापमान के उपर जाने पर कोयला स्वयं ही प्रज्वलित हो उठता है, तो कई दफ़ा खदानों के प्रवेश के निकट बिजली गिरने से। आस्ट्रेलिया स्थित बर्निंग माउंटेन विश्व की सबसे पुरानी आग है जो 6000 सालों से लगातर जल रही थी। बूटलेग खनन को रोकने के लिये विस्फोट से खान उड़ाने के कारण भी कई बार आग लगी हैं। सेंट्रालिया जैसे क्षेत्रों में खदानों के पास कचरा जलाने से आग लगी।ज़ाहिर है कि ऐसी आग के आसपास रहना खतरनाक होता है। तापमान अधिक रहता है और हवा में ज़हरीली गैस रहती है। इनसे उपजती ग्रीनहाउस गैसों के कारण पर्यावरण के लिये भी भारी खतरा होता है। भारत के साथ ही अमरीका, चीन, इंडोनेशिया, रूस, यूरोप और अफ्रीका ऐसी आग से जूझते रहे हैं। वैज्ञानिक आजकल रीमोट सेंसिंग सेटेलाईट से ऐसी ज्वाला का पता लगाने की कोशिश करते हैं।

2 टिप्‍पणियां:

Raji Chandrasekhar ने कहा…

jacha prayaas hei aap kaa.

किशोर कुमार ने कहा…

Thanx Mr. Chandrashekhar.
Kishore Kumae