सोमवार, 30 जून 2008

झारखण्ड में सूचना आयुक्तों की बहाली में राजनीति.

झारखण्ड में सूचना आयुक्तों की बहाली राजनीतिक दांव-पेंच में उलझ कर रह गया है। "प्रभात खबर" के २८ जून २००८ वाले अंक के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित श्री हरिवंश के आलेख ने इस नंगी सच्चाई को दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।
"प्रभात ख़बर" झारखण्ड सशक्त अख़बार है। इसके प्रधान संपादक श्री हरिवंश के जुनूनी अभियान ने इस अख़बार को " अख़बार नहीं , आन्दोलन " नारा बुलंद करने का अधिकार प्रदान किया है। हरिवंश जी उन चंद लोगों में से हैं, जिन्होंनें झारखण्ड में सूचना का अधिकार के आन्दोलन को व्यापकता प्रदान करने का काम किया था। आज उन्हीं हरिवंश को अपने अख़बार के माध्यम से सूचना आयुक्तों की बहाली के मामलें में महामहिम राज्यपाल से हतक्षेप करने के लिए याचना करनी पड़ रही है, तो यह बड़े शर्म की बात है और लोकतंत्र केलिए शुभ संकेत नहीं है।
सूचना आयुक्त के पद ऐसे लोगों की बहाली की जा रही है , जो डिजर्व नहीं करते हैं। झारखण्ड में सूचना अधिकार आन्दोलन का यह हश्र होगा , इसकी कल्पना नहीं थी। श्री हरिवंश के मुताबिक झारखण्ड में ९ सूचना आयुक्तों के पद हैं और वर्तमान समय में कुछ ऐसे लोगों को सूचना आयुक्त बनाने की कोशिश है, जो उस पद के लायक नहीं हैं। हद हो गयी। हे भगवन, इस झारखण्ड सरकार को माफ़ कर।


1 टिप्पणी:

Jan Shikshan Sansthan Bokaro ने कहा…

झारखण्ड में सूचना आयुक्तों की बहाली में राजनीति really शर्म की बात है और लोकतंत्र केलिए शुभ संकेत नहीं है।
Jharkhand sarkar ne satta mein bane rahne ka naitik haque kho diya hai.